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Hymn No. 2643 | Date: 29-Jan-2003
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प्यार की बात है, यार तू ही बता मैं किससे, मैं किससे करुँ।
प्यार की बात है, यार तू ही बता मैं किससे, मैं किससे करुँ।
वफा की बात है, यार तू ही बता मैं कैसे निभाऊँ, मैं कैसे निभाऊँ।
मन से हो या दिल से, मैं अपने अंतर की बातें करता हूँ।
मिटाना चाहता हूँ अपनी जिंदगी के वीरानियों को, तेरे प्यार की रोशनी में।
बड़ा सहेजके कदमों को रखता हूँ, उसी समय न जाने क्यों बिखर जाता हूँ।
तेरे संग रहते न जाने कैसे हो गया में इतना कमजोर कैसे शर्म आती है बदनूमाँ दाग बनके।
विरह के धुनों में बुनता हूँ तेरे यादों से भरे पलों को, सजाने के वास्ते जिंदगी को अपनी।
यार हमने तो बस तेरा हो जाना चाहा था, ये कहाँ से कहाँ पहुँच गया मैं।
जिंदगी को हंसी का दौर समझा था, आज हंसती जिंदगी मुझपे साथ लेके लोगों को।
बेईमान न था कभी मैं किसी ओर से, बेइमान बन गया हूँ यार मैं अपने आप से।


- डॉ.संतोष सिंह