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Hymn No. 2644 | Date: 01-Feb-2003
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थाम ले, थाम ले कसके मेरे हाथों को तू थाम ले,
थाम ले, थाम ले कसके मेरे हाथों को तू थाम ले,
चाहे हो जाये कुछ, छोड़ना न अब तू कभी, थाम ले ।
है न कुछ ऐसा, जो अर्पित कर संकू तुझे,
फिर भी अर्पित करना चाहूँ अपना सब कुछ तुझे थाम ले।
माना आया चलना नही तेरे बताये राहों पे,
फिर भी दिन रात चलता हूँ, तेरे दिखाये ख्वाबों में थाम ले ।
कोई भी पल गया न होगा जो करना न चाहा हो तेरा,
जब करने की बारी आयी, तो न जाने क्यों पस्त हो गयी हिम्मत मेरी थाम ले।
सारे आस टूट चुके है, फिर भी अंतर की लौ में मूरत तेरी झिलमिलाये,
करती है संचार सारे रग रग में वही प्रेम का।
दास तड़प उठता है फिर से तुझे जीने को थाम ले ।


- डॉ.संतोष सिंह