VIEW HYMN

Hymn No. 2649 | Date: 07-Mar-2003
Text Size
कुछ गाने का दिल करता है, तो कुछ सुनाने को दिल करता है।
कुछ गाने का दिल करता है, तो कुछ सुनाने को दिल करता है।
न जाने क्यों इठला - इठलाके नाचने का हर पल मन करता है।
बदलने को बदला न है कुछ, फिर भी बदला - बदला सब कुछ लगता है।
जैसे कुछ खोया हुआँ मिल गया या कोई रूठा हुआ मान गया है।
रोम रोम आनंद में तिर रहा है, अंतर न जाने क्यों खिल रहा है।
टूटा हुआ अंत न है तो भी आनंद की बयार चारों ओर बह रही है।
घनघोर रात के अंधियारे में, विश्वास की उजास चारों ओर फैल रही है।
जो न सोचा था उस ओर से नई राह की शुरूआत हो रही है।
मानो या न मानो परम प्रेम से धीरे - धीरे जीवन नई करवट ले रहा है।


- डॉ.संतोष सिंह