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Hymn No. 2650 | Date: 07-Mar-2003
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अनहोनियों से भरा है जीवन, होनी को नहीं टाल सकता कोई।
अनहोनियों से भरा है जीवन, होनी को नहीं टाल सकता कोई।
सामन्जस्य बिठाना पड़ता है, हंसते हुये पल पल जिंदगी जीना पड़ता है।
कृपा उसकी इतनी होती है, जिंदगी बिना छाप छोड़े पल में गुजरती है।
पल पल जिंदगी से सीख लेनी होती है, उसको अपने अनुरूप ढालके जीना पड़ता है।
भात है ये छोटी सी, मगर छाप छोड़ती है अनेकों जन्मों से भरी जिंदगी पे।
चलता रहा है खेल अनंत कालों से अनंत काल तक, उपजता है जो हमारे कर्मों से।
लेना देना न है प्रभु का किसी से, ये तो लेखां जोखा है हमारे कर्मों का।
परम् प्यार के सहारे जिंदगी को सहजता से हर हदसे गुजरना होता है।
चलता रहा है अनहोनियों का खेल, पर चलने न देना है कर्मों का खेल।
मिला है साथ परम् यार का उसकी कृपा से जिंदगी को अमरता में बदलता है।


- डॉ.संतोष सिंह