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Hymn No. 2646 | Date: 01-Feb-2003
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इतना होने पे भी कहता हूँ माँ, कुछ हुआ है अभी।
इतना होने पे भी कहता हूँ माँ, कुछ हुआ है अभी।
देने को तो बहुत कुछ है तुझे, तो दे दे पहले परम लायकियत तो मुझे।
बिना लिये न छोडूंगा, हकदार बनाने के लिये परम विश्वास दे दे मुझे।
कमियाँ हैं सारी मेरी ओर से, पूरी कर दे देके परम् भक्ति का जोर।
शोर न करुँ कमियों का, आ दे दे तू मुझे परम् शक्ति इतनी।
शुरूआत की थी माँ अनजाने में, अब करना चाहता हूँ पूरा पूरा ज्ञानी बनके।
रहना नहीं चाहता हूँ संसार के आसरे पे, जब हो तेरा परम सहारा साथ मेरे।
झूठा सच्चा अहम् न हो कोई, न ही कोई वहम्, तेरे रहम पे बीते पल पल जिंदगी मेरी।
करने में न रोऊँ कुछ का रोना, करता चला जाऊँ तेरी ही धुन में।
किसी की सोंच समझ को न है अपनाना, तेरे ही प्यार में हो जिंदगी बिताना।


- डॉ.संतोष सिंह