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Hymn No. 2647 | Date: 25-Feb-2003
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प्रभु जी तुम हो इस जग के कोने कोने में।
प्रभु जी तुम हो इस जग के कोने कोने में।
प्रभु जी तुम हो इस घर के कोने कोने में।
प्रभु जी तुम हो इस दिल के कोने कोने में।
प्रभु जी तुम हो इस मन के कोने कोने में।
प्रभु जी तुम हो हर तन के रोम रोम में।
प्रभु जी तुम हो हर कण के हर हिस्से में।
प्रभु जी तुम हो हर जीव के अंतर बाहर में।
प्रभु जी तुम प्रकटे हो संसार के भांति भांति स्वरूपों में।
प्रभु जी तुम्हारा नाम गूंजे हर अक्षर में।
प्रभु जी तुम बसते हो प्रेम भरे गीतों में।


- डॉ.संतोष सिंह