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Hymn No. 261 | Date: 07-Aug-1998
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मन में ज्योत् जला दे प्रेम की तू हमारें ;
मन में ज्योत् जला दे प्रेम की तू हमारें ;
उसके सहारे छान मारेंगे सारे ब्रह्माण्ड को,
चैन न आयेगा दिल को जब तक तूझे ढूँढ़ ना लेंगे।
अपनी औकात को भूलके करता हूँ तेरे आगे बड़ी – बड़ी बात;
मेरी बात छोटी हैं या बड़ी परवाह ना है मुझे;
राज की बात ये है, इन सब बातों के पीछे मुझे है तेरा सहारा ।
सब कुछ गँवारा है मुझे पर पल भर के लिये भूलना ना चाहूँ नाम तेरा,
एक बार नहीं कई - कई बार मैं कहता हूँ
तेरे सिवाय कौन है मेरा अपना, जो आज संग है कल वो बिछड जायेगे
नश्वर लोगों को कैसे मैं अपना मानूँ,
एक तू है, जो सदा से संग है हमारे ।


- डॉ.संतोष सिंह