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Hymn No. 262 | Date: 07-Aug-1998
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आग लगा लेनी है, तन मन में तेरे नाम की,
आग लगा लेनी है, तन मन में तेरे नाम की,

होम कर दूँगा उस आग में अपना सब कुछ।

रह जायेगा बस तेरा नाम, जो अनंत काल से था;

अनंत काल तक रहेगा, गूँजेगा चारों और ।

वही तो हक् शाश्वत् सत्य अक्षुण्ण है;

बाकी तो सब कुछ बन – बनके मिट जाता है ।

बार – बार मैं अपने प्रयत्न में होता हूँ असफल,

मुझे सफल होनें से ना मतलब है, प्रयत्न मेरा जारी रहेगा।

दास तो मैं तेरा पहले से था, अब भी हूँ,

कल भी रहूँगा, चाहे रहे मेरी कैसी भी दशा ।

नशा जो छा गया है तेरा, होश कहाँ मुझको कीसीका;

मेरा यार तू है, मेरा प्यार तू है तेरा हूँ तेरा ही रहूँगा।


- डॉ.संतोष सिंह