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Hymn No. 263 | Date: 08-Aug-1998
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अंधे को क्या चाहीये बस दो नैन, तेरे दीवानों को बस तेरा प्यार चाहीये,
अंधे को क्या चाहीये बस दो नैन, तेरे दीवानों को बस तेरा प्यार चाहीये,
प्यासा लौट जाये कुएँ के पास से, दुनिया भरकी चीजों से क्या मतलब हमें ।
जानते है हम दोष ना हैं कुएँ का इसमें, तेरा दीवाना बनके ना बन सका तेरा दीवाना ;
अनहोनी को होनी करने वाले, जो ना घट सका वहीं तू घटा सकता है ।
हमारा मन है कमजोर प्रभु, दृढ़ हो जायेगा तेरा सहारा पाकें,
खोने से अच्छा है हम दम तोड़ दे तेरे श्री चरणों में
किये है क्रुर कर्म बहुत, अब भी मन भटकता है कभी – कभी,
कई बार तूने झिंझोडा है नये सिरे से शुरूआत करते है हम भी ।
पता भी न चलता हैं हमें, कब उलझ जाते है मन की अनसुलझी गलियों में,
बार – बार गिरता रहूँगा, तेरा नाम लेके हर बार प्रयास करता रहूँगा;
तन बेदम हो जायेगा तो भी कोई ना रोक सकेगा, मन पहुँचेगा तेरे श्री चरणों में जरूर ।


- डॉ.संतोष सिंह