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Hymn No. 264 | Date: 08-Aug-1998
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सब कुछ तू ही तो है हमारा, तेरे सिवाय कौन है,
सब कुछ तू ही तो है हमारा, तेरे सिवाय कौन है,

कीसके पास जाकें रोयेंगे हम अपनी करनी के लिये ।

तू प्यार कर या दुलार दें, दोष ना है इसमें तेरा

खुद में खोयें रहते है, विमुख होके तुझसे।

तेरे बताये मार्ग का अनुसरण करके छोड देते है उसे;

अपने कर्मों का फल भोगते वक्त रोते है तेरे पास आके ।

ज्ञान के प्रकाश में सब कुछ देखकें, मन का सहारा लेते है;

पछताते हें बहुत, ठोकर लगने पे।

तेरे पास आके सजदा करते है अपने कर्मों के लिये;

तेरा बननें का दिखावा करते है ।

रहम दिल है तू, भूलके सब कुछ;

देता है पनाह अपने दर पे ।

बार – बार गुज़ारिश करते है हम तुझसे,

तेरा दर छोड के ना जाना पड़े फिर कभी ।

खुद ही पैरों पे कुल्हाड़ी मारते है अपने,

फिर गिडगिडाते है तुझसे, ठीक कर दे हमें।

पर दिल के कोनें में अहसास छुपा है तेरा,

बंद मन के कमरें में आस की कीरण है ।

तेरे विरह की आग में तप के मजबूत;

निकलूँगा जरूर, तेरे दर की ओर मुलाकात के लिये


- डॉ.संतोष सिंह