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Hymn No. 2653 | Date: 22-Mar-2003
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कोई गुनगुनाये प्यार भरी बातों को दिल में।
कोई गुनगुनाये प्यार भरी बातों को दिल में।
कोई याद दिलाये प्यार भरी मुलाकातों को मन में।
एक बार को श्वास होते हुये, श्वास गुम हो जाये ख्यालों में।
बार बार एक ही स्फूरण हो अंतर में, कोई दूर रहके पास है हमारे।
आँखों को मीचूं तो, उभरे तस्वीर नजरों में उसकी।
चाहूँ या न चाहूँ, गुम हो जाऊँ हर बार ख्वाबों में उसके।
कसक जागे जब जब मन में, ठसक लगे दिल को विरह की।
खेल खेलके गुम हो जाये, बीते हुये पलों में बदल के।
न जाने क्या चाहे, जो हमारी चाहत को हर वख्त तड़पाये।
असर न हो हमारी तड़प का, न जाने कौन सी कसर वो निकाले।


- डॉ.संतोष सिंह