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Hymn No. 2656 | Date: 03-Apr-2003
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जय जगदंबे, जय सिध्दअंबे, मांग है दिल में तू क्यों न पूरी करे।
जय जगदंबे, जय सिध्दअंबे, मांग है दिल में तू क्यों न पूरी करे।
पुकारूं नित्य तोहे कातर स्वरों में, करुणामयी तू क्या न पूरा करे।
चाहा है दिल ने तुझे भजना, भजते भजते तेरा हो जाना।
ऐसी कौन सी है बात, जो पूरी न करने दे मेरी मांगों को।
अब तो हो जाये चाहे कुछ, छूटेगी न ये रट चाहे सच्ची हो या झूठी।
रह जाता हूँ कई बार भुलाके दुनिया में, याद आते तड़प उठता हूँ उजालों में।
मां तूने सबकी मांग पूरी की है, क्यों न पूरी करे तू मेरी मांगो को।
जिद न है कोई तुझसे, भर दे मेरे दिल को तेरी शक्ति भक्ति से।
मेरे में न हे वो जोश - खरोश, न ही है वो संजीदापन माँ तेरे वास्ते।
फिर भी बदल जाना चाहता हूँ, हमेशा के लिये माँ तेरे वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह