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Hymn No. 2658 | Date: 04-Apr-2003
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वो देने वाला तूने दिया कितना कुछ, फिर भी अधूरा रहा क्यों मैं।
वो देने वाला तूने दिया कितना कुछ, फिर भी अधूरा रहा क्यों मैं।
जब जब मिला, तब तब किया सराबोर दिल को प्यार से तूने अपने।
फिर क्यों जन्में मनमें उल्टे सीधे खयालात, जो पैदा करे विचित्र हालातों को।
निकलना चाहा जब - जब तोड़के संसार के चक्रव्यूहों को तो क्यों ओर फंसता गया।
दम तोड़ने से पहले विश्वास हो जाना चाहता हूँ तेरे प्यार को याद करते हुये।
खो देना चाहता हूँ अपने आपको हर हालात में मुझे अहसास करते हुये।
मिलने को तो मिला बहुत कुछ, वो मिलना किस काम का जिसमें हो बिछुड़ना।
लुटा हुआ हूँ किस्मत ओर कर्मों के हाथों, ऐसे को तू लूट ले प्यार से अपने।
संवरना चाहता हूँ तेरे संग रहते, तुझसे दूर होना ही न चाहते हुये बिखरना है।
दे दे मुझे तू एक बार वो, जिसे पाने के बाद मतलब न रहता है कुछ ओर पाने का।


- डॉ.संतोष सिंह