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Hymn No. 2659 | Date: 04-Apr-2003
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ओ साकी, ओ साकी, पिलाते जा, पिलाते जा प्यार का ऐसा पैमाना।
ओ साकी, ओ साकी, पिलाते जा, पिलाते जा प्यार का ऐसा पैमाना।
छूट जाये मन के सारे भ्रम, जीत जाऊँ जिंदगी को दिल की आवाज पे।
क्या शरमाना, क्या बचपाना, न हो प्यार में प्यार के सिवाय कोई और पैमाना।
जिस राह से गुजरूँ वो राह हो तेरी, नीलें आसमॉ तले हर धर हो अपना।
सपनो की न कोई बात हो, न पीने ओर पिलाने वालो की कोई जात हो।
टूट जाये जो अगर पैमाना, तो नजरों से छलकाते ता उम्र दिल को पिलाना।
होश में अब कौन रहना चाहे, तेरे रहते कुछ और क्यों मांगना चाहूँ।
पिलाने वास्ते न देखना पड़े कोई खुशियों से भरी बात, यूं ही अंदाज रहे मस्ती की।
यूं ही दस्तूर जारी रखना पीने ओर पिलाने का, न रह जाये दिल में पीने के सिवाय कोई ओर बात।
भेंट चढ़ जाये जिंदगी पीने में, पीना ही हो मेरी बंदगी प्रभु प्रेम मजबूर हो में जिंदगी।


- डॉ.संतोष सिंह