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Hymn No. 2660 | Date: 21-Apr-2003
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जो अंतर से निकले वही गीत है।
जो अंतर से निकले वही गीत है।
बाकी सब तो शब्दों से भरे बोत है।
लाग लपेटों से परे दिल का वो सच्चा हाल है।
प्रभु के लिये वो सबसे बड़ा जाल है।
हर ले काका को प्रेम से भरे दो बोल बोलके।
मेलजोल ऐसा बढ़ेगा, चढ़ेगी तेरी प्रेम रौ उसपे।
अस्त होते जीवन की होगी शुरूआत नई।
बुझेगी प्यास न जाने कितने जन्मों की लगी।


- डॉ.संतोष सिंह