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Hymn No. 2662 | Date: 25-Apr-2003
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है.. वो ये कहते हैं हम प्यार के काबिल नहीं।
है.. वो ये कहते हैं हम प्यार के काबिल नहीं।
गवारा न है उनको साथ हमारा, कि हम बदनाम जो है।
चस्पाना चाहते नही अपना नाम साथ हमारे, कि अंदाज गलत है हमारा।
नजरों से कर दिया दूर हमको, कि हमने याद न किया उनको।
सुना था छोड़ते न हैं साथ किसीका, जो छुड़ाये हाथ कितना भी।
चुपके से ढकेल दिया कर्मों की खांई में, कि ये अंजाम है तेरा।
गवारा है सब कुछ हमको कितना भी चाहूँ किया हुआ है तो हमारा।
उल्फत से भरे दिल में हमारे है अगर प्यार की एक बूंद तो देता हूँ तुझको।
पड़ गयी हो आदत जो बदनामियों की, तो रास कैसी आयेगा तेरा प्यार हमको।
सलाम करता हूँ तेरी इनायत के वास्ते, जो तेरी यादें तो हैं मन में।


- डॉ.संतोष सिंह