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Hymn No. 2665 | Date: 26-Apr-2003
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अंदाज है सबका अपना अपना जीने का, मैं तो जीना चाहता हूँ तेरे रंग में रंग के।
अंदाज है सबका अपना अपना जीने का, मैं तो जीना चाहता हूँ तेरे रंग में रंग के।
जब किसी को कोई रोक टोक न हो ढलने में, मैं तो ढल जाना चाहता हूँ तेरे रुप में।
कोई कितना भी रखे अपना अस्तित्व बरकरार, मैं तो मिटा देना चाहता हूँ अस्तित्व अपना
कोई देखे कितना भी निराला कोई सपना, मैं तो अपनाना चाहता हूँ तुझे हकीकत में।
कोई रह ले अपने आप में भुलाके तुझे, मैं तो भूल जाना चाहता हूँ प्यार में तेरे।
कहने के लिये न कहना चाहता हूँ कुछ तुझे कहना, करने में बदल जाये अब तो जीवन में।
मैं औरों का क्या कुछ ओर न करना चाहूँ, खुद को मिटा देना चाहूँ तेरे पीछे।
धड़के दिल पल पल अब तो तेरे इशारे पे, मुस्कराना चाहूँ पल पल तेरे प्यार की मस्ती में।
आजिज आके न कुछ कहता हूं तुझसे, तेरी याँदो में बिसूरते पलों में ढूंढ़ता हूँ तुझको।
दिल की हकीकतों से न है तू अनजान, सारी मर्यादाओं को तोड़के मिल जाना चाहूँ तुझसे।
- डॉ.संतोष सिंह
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