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Hymn No. 2666 | Date: 03-May-2003
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इतना बदल जाओगे खुद को पहचान न पाओगे।
इतना बदल जाओगे खुद को पहचान न पाओगे।
प्रभु के जाम को जो पिया तो मस्त हो जाओगे।
घूंट भरते ही प्रभु प्यार में चूर होते जाओगे।
चलेगा जोर इतना मन पे, होके सबसे दूर जा बैठोगे प्रभु चरणों में।
दिल ही दिल में होगी बाते, नजर मस्त हो जायेगी दिव्य दर्शन में।
जो हुआ न था वो होता जायेगा, खुद को प्रभु प्यार में खोता पाओगे।


- डॉ.संतोष सिंह