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Hymn No. 2667 | Date: 06-Jun-2003
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मां खोल दे मन की सारी गांठ, मिल जाऊँ प्यार से अनायास।
मां खोल दे मन की सारी गांठ, मिल जाऊँ प्यार से अनायास।
फूटे कंठ से नवगीत प्रेम के, जो झूमे दिल प्यार की तरंगो पे।
हो चाहे कोई कितना भी आस पास, पर अंतर में हो तेरा वास।
श्वास दर श्वास हो मुलाकात, मिट जाये ये दूरी पल भर के बाद।
करती है मगल तू दुनिया का, खत्म कर दे तू दंगल मेरे जीवन का।
बढ़ता जाये तुझमें इतना विश्वास, रहना पड़े हर पल तेरे साथ साथ।
पुकारने की न कोई बात रहे, बंद पलक हो या खुली मुलाकात हो नजरों में।
गुजर जाये गर जिंदगी, टूटे न ये रिश्ता प्रेम भरा।
धरा पे जब जब जन्म पाऊँ, प्रेम भरे तेरे भक्ति के अमर गीतों को गाऊँ।
सुध न हो मुझे कभी आने की कभी जाने की, रजामदी से तेरा हो जाने का।


- डॉ.संतोष सिंह