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Hymn No. 2675 | Date: 06-Aug-2003
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मेरे सनम मान या न मान, लिया है जन्म हमने तेरे लिये।
मेरे सनम मान या न मान, लिया है जन्म हमने तेरे लिये।
अभी तक पूरा कर न पाया तो क्या, पूरा करुँगा आज ही तेरे ख्वाबों को।
जो संजोया तेरे पास रहके, फलीभूत करके ही दम लूंगा तेरे चरणो में।
मुश्किलों का रोना रोता नही हूँ, मैं तो मारा हुआ हूँ अपने आलस्य का।
सरोकार मुझे न है किसीसे, रुक जाते हैं कदम लोगों की सोच सोच के।
खेल रहे है खेल मेरे कर्म, जो किया था भरम में खुद को बहुत कुछ मानके।
दानत बिगड़ी न थी बिगड़ गयी मेरी किस्मत, तेरा कहा न करके।
अब तो अजिज आ गया हूँ अपने आप से, करना चाहता हूं अब पूरा प्रयास।
मस्ती भी न जाने कहाँ चली गयी, तेरे बिना रहता है हर पल जो उदास दिल।
तलाश मेरी खत्म कर दे, जो तू चाहे वो मुझसे हर हालत में पूरा करवा ले।


- डॉ.संतोष सिंह