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Hymn No. 2676 | Date: 07-Aug-2003
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गुहार है मां तुझसे, पूरी करवा ले तू, मेरे अंतर की आस को
गुहार है मां तुझसे, पूरी करवा ले तू, मेरे अंतर की आस को
खरा उतरना चाहा तेरे नजरो में, न जाने क्यों उतना ही गिरता चला गया।
समझके भी न समझा, तेरे पास रहते मुरखाई में जीवन जीता चला गया।
अंत न हो मेरे कर्मों का, फांस धीरे धीरे कसती चली जाये किस्मत की।
मत छोड़ तू मुझे मेरे कर्मों के हाल पे, काट दे तू कर्मों के जाल को।
दे दे तू सामर्थ्यता अपने अनंत में से इतनी, बन जाऊँ अकूत पुरूषार्थ का धनी मैं।
मायने न हो दर्द का, मस्त हो जाऊँ तेरी परम भक्ति में।
शक्ति स्वरूपा है तू सदा से, दूर कर दे तू मेरे अशक्तपन को।
पल पल जीयूँ मैं जिंदगी को तुझसे जुड़ के पल भर ना होऊँ जुदा मैं।
अंतर की बात को तू जाने मां, तो क्यों न करे पूरी मेरी साध को।
- डॉ.संतोष सिंह
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