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Hymn No. 2677 | Date: 10-Aug-2003
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रुठो न हमसे ओ दुनिया के मालिक, हम हैं तेरे गुलाम जन्मों जन्म के।
रुठो न हमसे ओ दुनिया के मालिक, हम हैं तेरे गुलाम जन्मों जन्म के।
तेरा कहा करना चाहें दिल से, आड़े आये कभी मन, तो कभी कौन से कारण।
चाहना न जाने कितनी छुपाया हूँ दिल में, फिर भी पूरी कर न पाऊँ एक भी मैं।
एक के बाद एक दोहराऊँ अनेकों खताओं को, रुकना चाहूँ फिर भी रोक न पाऊँ खुदको।
आस लगा रखी है तुझसे, हो जाये चाहे कुछ भी छुड़ायेगा तू इस मोहपाश से हमको।
बता तू मुझसे क्या कर दूँ कुछ ऐसा, कि हो जाये मजबूर तू मदद करने के वास्ते।
हर कदम पे चाहता हूँ, तुझे साथ अपने, तेरे बिन् एक पल भी न है गवारा।
कमियों के सिवाय न है कुछ पास अपने, फिर भी देखूं दिन रात तेरे सपने।
जला कई बार अपने कर्मों से, फिर भी फूंक फूंक के न रखा न कदम हमने।
ओ सबेरा कब तू लायेगा, जो कर देगा रोशन हर पल मेरे जीवन का।
- डॉ.संतोष सिंह
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