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Hymn No. 2680 | Date: 16-Aug-2003
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वो कब पल आयेगा, जब हर कहा तेरा करता चला जाऊँगा।
वो कब पल आयेगा, जब हर कहा तेरा करता चला जाऊँगा।
वो कौन से दिन से होगी शुरूआत, जो तेरी धुनों मैं गुजारुँगा जिंदगी।
वो कौन से होंगे जीवन के क्षण, जब तुझसे होगा संवाद हर पल।
वो कौन सी बात होगी, जिसके होते अंत हो जायेगा विरह के पलों का।
वो कौन से कर्म होगे, जो मुझको मजबूर कर देंगे तेरा हो जाने को।
वो कौन से होंगे ख्यालात, जो खीचेंगे तुझको मेरे पास रहने को।
वो कौन सा होगी सौगात, जिसके वास्ते तू रोक पायेगा अपने आपको।
वो कौन सा होगा नगमा, जिसको सुनने के वास्ते तू होगा अधीर।
वो ऐसा क्या होगा, जिसके लिये तेरा दिल मजबूर होगा।
अंत न है मेरे सवालों का, फिर भी देता नहीं तू जवाब क्यों।


- डॉ.संतोष सिंह