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Hymn No. 2683 | Date: 20-Aug-2003
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एक बार माँ एक बार तू कर मुझपे तेरी प्रेम भरी कृपा, भवसागर से पार लगा दे नैया मेरी।
एक बार माँ एक बार तू कर मुझपे तेरी प्रेम भरी कृपा, भवसागर से पार लगा दे नैया मेरी।
हर रोज हिचकोले खाऊं जो बरसे तेरी प्रेम कृपा तो तूफानों में संवर जाऊँ।
दुनिया का हर पहलू रोक सकता है मुझे, माँ तेरे आगे न है कोई बिसात उनकी।
जो एक बार मिली प्यार भरी सौगात तेरी, तो पलक झपकते काया पलट हो जायेगी।
अंत न है मेरी कमियों की, भाप बनके उड़ते देर लगेली जो बरसेगी तेरी दया से।
अनवरत तेरी कृपा चाहता हूँ, अनंत घड़ियों के वास्ते बन जाना चाहता हूँ तेरा।
मत होने दे मुझे कर्मों के हवाले, खत्म कर दे मेरी जिंदगी के सवालातों को।
अनुग्रह चाहता हूँ हर पल माँ तेरा, अब न रहने दे तू मुझे जिंदगी मैं अकेला।
जो अनचाहे दौर खत्म न हो रहे हों जिंदगी के, खत्म कर दे तू अपनी कृपा से।
माँ कुछ न तेरा जायेगा, पर तेरी दया से तेरा बंदा हमेशा के वास्ते सुधर जायेगा।


- डॉ.संतोष सिंह