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Hymn No. 2684 | Date: 27-Aug-2003
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प्रभुजी, ओं.. ओं.. प्रभुजी हो हर पल तुम संग हमारे, तो क्यों भूल जाते है हम तुझे। प्रभुजी...
प्रभुजी, ओं.. ओं.. प्रभुजी हो हर पल तुम संग हमारे, तो क्यों भूल जाते है हम तुझे। प्रभुजी...
दुःखों मैं तुम याद आते हों अपने आप, तो क्यों भूल जाते है हम सुखों मैं अपने। प्रभुजी...
ये कैसा भ्रम है, जो रहते पास याद करते है तुझे, पर तुझसे बिछुड़ते भूल जाते है, क्यों तुझे। प्रभुजी...
कैसे पाऊं विजय अपने आप पे मैं, जो हार जाता हूँ हर पल तेरी माया के आगे। प्रभुजी...
बातें बनाने न आया हूँ, रहते तेरे भक्ति भरे गीतों को गाना चाहूँ निरंतर। प्रभुजी...
सवालों का अंत हो जाये पास पहुँचते तेरे, तुझसे तनिक सा दूर होते क्यों जन्म लेने लगती है शंकायें। प्रभुजी...
क्या झुठा है मेरा प्रेम तेरे वास्ते जो तुझसे दूर होते डगमगाने लग जाते है मेरे विश्वास को। प्रभुजी...
पूरी करवा ले तू अपनी हर साध, रखके तेरे पास, न हो मेरे दिल मैं कभी दुनिया का वास। प्रभुजी...
कभी लागे क्यों समय बीता जाये इतनी तेजी से, पर पास पहुँचते तेरे लागे समय है हाथों मैं। प्रभुजी...
तोड़ दे तन मन की हर जंजीरों को, बांध ले अब अपने अनंत प्रेम पाश मैं। प्रभुजी...


- डॉ.संतोष सिंह