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Hymn No. 2685 | Date: 28-Aug-2003
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हकीकतो से भरे जीवन मैं जीना चाहता हूँ, तेरे प्रेम के वास्ते।
हकीकतो से भरे जीवन मैं जीना चाहता हूँ, तेरे प्रेम के वास्ते।
रास्ते हो कई, तो क्या, चलना चाहता हूँ, तेरे प्रेम के वास्ते।
कोई कुछ भी सोंचे या कहे, डूब जाना चाहता हूँ सदा के वास्ते तेरे प्रेम मैं।
क्या होगा आगे जाके मेरा, ये जीवन को रंगना चाहता हूँ तेरे प्रेम में।
दशा कैसी भी हो मेरी, तेरे रहते प्रेमनशा करना चाहता हूँ जीवन मैं।
दाल गले या न गले, पल - पल बिताना चाहता हूँ तेरे अमर प्रेम मैं।
परवाह कोई करे या न करे, मैं परवाह करना चाहता हूँ तेरी रजामदीकी।
सताये कोई कितना भी, फिर भी उजागर करना नहीं चाहता तेरे प्यार को।
रूठे या मनाये कोई हमको, परवर दिगार तेरे प्रेम के सिवाय कुछ न हो दिल मैं
सारे बंधन मैं रहते या तोड़के, बंध जाना चाहता हूँ प्रभु अप्रतिम प्रेम डोर में।


- डॉ.संतोष सिंह