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Hymn No. 266 | Date: 09-Aug-1998
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जिंदगी तेरा प्रसाद है प्रभु, दिया तूने कई - कई मिन्नतों के बाद;
जिंदगी तेरा प्रसाद है प्रभु, दिया तूने कई - कई मिन्नतों के बाद;
आज इस घर में हैं, कल कीसी और घर में होगे।
कीतनी बार लिया है शरण घरों में, कई बार बेघर भी रहे,
अपना माना है इसे उठानी पड़ी ज़िल्लतें बार – बार ।
ख्वाबों को सच माना, छूटने पे पछतायें है हम;
हर बार कसमें – वादे किये, टूटने ना देंगे हम ।
उसे भी भूले बार – बार, गोता लगाया आँख मूँद के माया में;
हर बार ठुकराये गये वहाँ से, चिपके हुये थे भगाये गये ।
बार – बार लौटे तेरे दर को, प्रेम और श्रध्दा के आँसू बहाये;
कमजोर हम है, कमजोर तू नहीं, ढाँल दे हमें ऐसी मिट्टी में,
माया के हर बंधन को तोड़ शरण ले लें तेरे चरणों में सदा के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह