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Hymn No. 2705 | Date: 08-Oct-2003
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पुकार कब तक करेगा अनुसुनी, तू मेरी, कह ले तू कितना भी कुछ सुनता है तू जरूर।
पुकार कब तक करेगा अनुसुनी, तू मेरी, कह ले तू कितना भी कुछ सुनता है तू जरूर।
गाफिल हूंगा जरूर अपने में, पर इतना भी नही कह न सकूँ कुछ तुझे।
कायम किया है रिश्ता दिल का, इसे तोड़ना बस में नही जन्मों ओर कर्मों के।
चैन लेने देता नही मेरा मन, जो अकेले मैं तड़पता है पल पल तेरे लिये।
रातों को तनहाई सोने नहीं देती, दिल भी छटपटाता है मिलने के लिये।
पर्त दर पर्त चढ़ जाती है दुनिया में रहने पे, कुरेदती है तेरी यादों के घेरे में।
कैसे समझाऊँ हाल अपना, बेबस बनके फड़फड़ाता हूँ तेरे इंद्रजाल के घेरे में।
सवेरा दर सवेरा बदलता जाये अंधेरे में, कब उगेगा सूरज मेरे प्यार का जीवन में।
तरस गये एक पल के लिये, जो सोचा न था मुलाकात हो जायेगी इतनी लंबी।
माना मायने ना है हम तेरे लिये, पर मायने बहुत है इस दिल के लिये।
कीमत चुकाना तेरी हमारे बस मैं नही, हमारा पल पल कायम है तो तेरी कृपा से।
- डॉ.संतोष सिंह
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