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Hymn No. 2706 | Date: 08-Oct-2003
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हम भी तो वहीं से आये हैं, जहाँ हैं तेरा घर।
हम भी तो वहीं से आये हैं, जहाँ हैं तेरा घर।
हमको भी तो वही जाना है, जहाँ है तेरा घर।
जन्नत का क्या करना, जो हो तुझसे दूर होके जीना।
नर्क से क्या डरना, जब हो हर पल तेरे प्यार मैं जीना।
पीने के वास्ते मयखाने मैं क्यों जाना, जो हो नशा तेरे प्यार का।
सवार हो जाये मस्ती मुलाकातों मैं, जो होती है ख्यालों मैं।
कोई रंज न है किसीसे, न ही है कोई बेगाना अब जहाँ मैं।
सबब अब कौन सा है सीखना, जो हर पल हो तेरे लिये जीना।
माफ करना, करुँ में पूजा कैसे, जो फुरसत न मिले दिल को प्यार करने से।


- डॉ.संतोष सिंह