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Hymn No. 2707 | Date: 09-Oct-2003
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होता है तू जब जब नजरों के सामने, सम्हाले नही सम्हलता दिल।
होता है तू जब जब नजरों के सामने, सम्हाले नही सम्हलता दिल।
दूर होते ही तेरे, तड़पते है पल पल जलते विरह की आग में।
चैन नही मन को, बेचैन होता हूँ जो मिलते न है शब्द क्यां कहने को।
रहा न कोई सुनने वाला, न रह गया अब कोई सुनाने वाला हमको।
कैसे बताऊँ क्या बताऊँ, गाहे बगाहे हर हालातों मैं जो तू याद आये।
बदलने को तो कुछ बदला न है, फिर भी प्यार मैं पल पल बदलता जाऊँ।
मानां झुकी है दुनिया वख्त के आगे, वख्त से पहले बन जाना चाहता हूँ प्यार तेरा।
गुस्ताखियाँ करने से न चूके हम, सजा हो या न पर तेरी यादें बनी रहें।
बेरहम था मैं जो अब तक न समझा तुझे, पर अब प्यार करुँगा खुब खबर न होने दूंगा।
प्यार की लपेटों को भींचके सीने में, दिल को जलाऊँगा अपने पर आंच भी न लगने दूंगा तुझे।


- डॉ.संतोष सिंह