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Hymn No. 2709 | Date: 09-Oct-2003
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न जाने कौन सी करनी है, जो पीछा न छोड़े मेरा।
न जाने कौन सी करनी है, जो पीछा न छोड़े मेरा।
जन्मो जन्म गुजरते जाये, फिर भी राह रोके नजर वो आये।
बिसात मेरी न है, पर प्रभु आगे उसकी भी बिसात है कहाँ।
एक बार जो तू चाहे, तो उसकी ऐसी तैसी हो जाये।
जाने को कुछ न जायेगा तेरा, बिछुड़ा हुआ घर लौट आयेगा।
निकाल लेना फिर जो कसर, पूरी करुँगा बड़े पुरजोर से।
तूने न है की अनुसूनी किसी की गुहार की, कर दे तू आज पूरी।
दुर्गत हो रही है दुनिया मैं, तेरे रहते जरूरत बदल रही है।
कब खत्म होगा ये दौर, जो लगता है अंतहीन आज हमको।
समय रहते हो जाना चाहूँ तेरा, खुदको तूझपे लुटा देना चाहूँ।


- डॉ.संतोष सिंह