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Hymn No. 2710 | Date: 09-Oct-2003
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जाओगे कहां, जाओगे कहाँ, जाओगे कहाँ, बच बचके तुम जाओगे कहाँ
जाओगे कहां, जाओगे कहाँ, जाओगे कहाँ, बच बचके तुम जाओगे कहाँ
जहां मैं जहां भी जाओगे, हमारे प्यार से तुम अपने आपको घिरा पाओगे।
ये अंतर की बात है, जो सुलगे दिल मे दिन - रात,
इसकी रोशनी से दूर होगा हर अंधेरा, मुलाकात करने तुम अपने आप आओगे।
ये चाहतों का सिला है, जो लेने देता नहीं राहत हमको कहीं।
तो तुम कैसे बच पाओगे, जाते जाते कहीं हमारे पास यूं ही चले आओगे।
दम तो हमारे मैं भी न है, ये गुर सिखाया है जो तूने।
न चाहते हुये अपने ही दांव से कैसे तुम बच पाओगे, हंसते हुये चले जाओगे।
लाज रखनी पड़ेगी प्यार की, हमको यों ही न टाल पाओगे।
सब जानते समझते प्यार का हकदार बनाओगे, मुस्कराते गले से लग जाओगे।
नसीहत लाख दी काम न आयी एक भी, जलके रौशन करुंगा तेरे प्यार को।
तेरे प्यार से तुझको खींच लाऊंगा, तेरे अनुरूप अपने आपको बनाऊँगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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