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Hymn No. 2712 | Date: 09-Oct-2003
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तुम्हारा आना, जीवन का महक जाना।
तुम्हारा आना, जीवन का महक जाना।
गम से भरे पलों का, पल मैं गुजर जाना।
मायूसी से निकलके, चिड़ियों सा चहक जाना।
भौंरो की मस्ती आये, जो हो तेरा साथ पाना।
फूलों की खुशबू चारों ओर धीरे से बिखर जाये।
लरजते लबों से तेरे प्यार का गीत गुनगुनाना
सुनने सुनाने से परे अपने आपको भूल जाना।
तेरा रहना, मौत ओर जिंदगी के भेद को भूल जाना।
जो चाहूँ, वो अनजाने मैं अपने आप होता जाये।
सोते जागते हुये भी हर पल तुझको अपने पास पाना।


- डॉ.संतोष सिंह