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Hymn No. 2713 | Date: 11-Oct-2003
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गुनगुनाने लगा, तेरे पास पहुंचते ही मेरा रोम रोम थिरकने लगा।
गुनगुनाने लगा, तेरे पास पहुंचते ही मेरा रोम रोम थिरकने लगा।
मन मैं नवजीवन का संचार हुआ, आजाद ख्याल तुझे देखते ही साकार हुआ।
आंखों से आंख मिलते ही, ना बदलके सब कुछ बदला बदला सा लगे दिल को।
जो चला बातों का दौर, तो लगे मिल गयी सारे जहां की खुशी मुझे आज।
जीवन के सारे राजों पर से परदा उठ गया, जो देखते देखते डूबा तुझमें।
अनायास ही जीवन का सार मिला, जो तूझ जैसा खेवनहार मिला।
कुछ न पुछा, कुछ न कहा, फिर भी अंतमे परम् सत्य का साम्राज्य मिला।
सारे गिले शिकवो का अंत हुआ, जो सबके भीतर तेरा रूप साकार हुआ।
रह न गया कुछ कहने को, कहने से पहले जो जान सब कुछ तुझसे।
अपनत्व को आयाम मिला, जो खुदको पाया तुझमें सदा से हमने।


- डॉ.संतोष सिंह