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Hymn No. 2714 | Date: 11-Oct-2003
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सारे प्यार के आयाम को तोड़ देना चाहूँ, तेरे प्यार की तस्वीर बनके।
सारे प्यार के आयाम को तोड़ देना चाहूँ, तेरे प्यार की तस्वीर बनके।
हकीकत मैं हो जो नामुमकिन उस किस्से को साकार करना चाहूँ, प्यार का मसीहा बनके।
नसीब का लिखा हुआ झुठलाना चाहता हूँ, तुझे निराकार को आकार मैं बांधके।
हर दिलदार का दिल धड़काना चाहता हूँ, तेरे अमर प्रेम का नवगीत लिखके।
चुरा ले जाना चाहता हूँ सरेआम तुझको, जो न हो सका उस प्रेमकथा को अंजाम देके।
सारे संसार के हर पूजाघर को खाली कर देना चाहूँ, हर मनमदिर मैं तुझे बसाके।
जो चाहे वो घिरके तेरा नाम ले लेके, दीवानों को परवाना बना दूं तुझे प्यार कर करके।
व्यवहार से भरे संसार के सारे नियमों को तोड़के, खलिश तेरे प्यार के सहारे जीना चाहता हूँ जिंदगी को।


- डॉ.संतोष सिंह