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Hymn No. 2715 | Date: 12-Oct-2003
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रुठे हुये को मनाये कौन, चांद सितारों को हर रोज नचाये कौन।
रुठे हुये को मनाये कौन, चांद सितारों को हर रोज नचाये कौन।
नदियों को आगे बढ़ना सिखाये कौन, सागर को मर्यादा मैं रखे कौन।
जो जीवन में लागे असम्भव, उसे कर दिखाये कौन, कौन करे पूरी सबकी हसरतों को।
दिल मैं उभरे नाम एक ही तेरा, माँ बस तेरा नाम, तेरा नाम ।
जानके अनजान न बन तू, मेरी हार को जीत में बदल दे तू।
कृपा के जोर से हो या पुरूषार्थ से, बंधेगा सेहरा तेरी दया पे।
बचपन गंवाया बचपने मैं रहके, जवानी में लड़खड़ाया होशो हवास गंवाके।
अब जो है जीवन में तेरा साथ तो फरियाद किससे, सब जानके अनजान न बन।
जीवन के हर हिस्से को प्यार से गुलजार करके, तेरी रहमत को नव आकार दे दे।
तड़पते हुये जीवन का सारा सामान दे दे, अपने बिछुड़े हुये को अंजाम दे दे।


- डॉ.संतोष सिंह