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Hymn No. 2717 | Date: 13-Oct-2003
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खोया हूँ अपने आप मैं इतना, भूल जाता हूँ तुझको।
खोया हूँ अपने आप मैं इतना, भूल जाता हूँ तुझको।
विश्वास की बात करते करते, रूठ जाता हूँ तुझसे।
दिन रात कवायद करता हूँ तेरी, कर नहीं पाता हूँ कहा तेरा।
गुजरता जाये समय पलों में बदलके, तकता रह जाता हूँ मैं।
गुहार है अंतर की, बुहार दे मेरी राह के सारे विघ्नों को।
यों ही गुजर जाने से अच्छा है, संवाद दे तेरी भक्ति मैं सराबोर करके।
जन्मो जन्म के प्यास को, बढ़ा दे तेरे प्रेम की अखंड ताकत से।
कृपा के अनंत जोर से, मिटा मेरे आलस से भरे दौर को।
बंद कर दे मेरी बोलती, तेरे अनंत मौन भरे संवाद से जोड़के।


- डॉ.संतोष सिंह