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Hymn No. 2724 | Date: 27-Oct-2003
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जग में अज्ञानी माँ मुझसा दूजा न कोई, माँ दूर करो अज्ञान मेरा।
जग में अज्ञानी माँ मुझसा दूजा न कोई, माँ दूर करो अज्ञान मेरा।
जग में खल कामी माँ मुझसा दूजा न कोई, माँ दूर करो मेरा खल कामीपन् ।
जग में गया गुजरा माँ मुझसा दूजा न कोई, माँ दूर करो मेरो गुजरा गयापन् ।
जग में आलस का माँ साक्षात स्वरूप मेरो, मां दूर करो मोरे आलसपन् को।
जग में दुष्टता का माँ दूसरा नाम मैंरो, माँ दूर करो मोरे सारे दुर्गुणों को।
जग में कमियों का रोना रोने वाला माँ मुझसा कोई नहीं, माँ दूर करो मोरी कमियों को।
जग में दूसरों की कमियों को देखने वाला माँ मैं अकेला, माँ दूर को मेरे मन के इस भाव को।
जग में डूबा हुआ अपने स्वास्थ में माँ एक अकेला मैं, माँ दूर करो मेरी इस आदत को।
जग में ईष्यालू माँ मुझसा दूसरा कोई नही, माँ दूर करो मन के इस दुर्भाव को।
जग में संवारनेवाला माँ मुझको तेरे सिवाय कोई दूजा नहीं, माँ थाम ले मेरे जीवन की नैया को।


- डॉ.संतोष सिंह