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Hymn No. 2726 | Date: 29-Oct-2003
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माँ.. माँ.. कृपा करो, माँ.. माँ.. कृपा करो, कृपा का हर, ज्वार बहा दो।
माँ.. माँ.. कृपा करो, माँ.. माँ.. कृपा करो, कृपा का हर, ज्वार बहा दो।
घुल जाये तन मन के सारे विकार, जो रोके हुये है मेरे कर्मों को।
खामियाँ बसी है रोम रोम में, जो करने न दे चाहा हुआ तेरा।
बह जाऊँ मां तेरी कृपा में कुछ ऐसा, करता चला जाऊँ खोके तुझमें।
मां तेरी अनंत कृपा का सैलाब बहा दे, अपने सारे रागों को भुला दूं।
कृपा का सैलाब बहे मेरी जिंदगी मैं, मन के सारे जंजाल मिट जाये।
अविरल रत रहूँ तेरी कृपा से, अनचाहा जैसा रह न जाये कुछ दिल में।
अस्तित्व की मांग न है, अस्तित्व को खो देना चाहूँ माँ तेरी कृपा में।
छू न सके संसार की कोई आंच, तेरे सांचे मैं ढल जाऊँ माँ मैं आज।
निहाल कर दे मां तेरी कृपा से, आज के सिवा रह न जाये कुछ कल के लिये।


- डॉ.संतोष सिंह