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Hymn No. 2727 | Date: 29-Oct-2003
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मद न पड़ने दूंगा दिल की आंच को, होम करुँगा अपने आप को।
मद न पड़ने दूंगा दिल की आंच को, होम करुँगा अपने आप को।
चाहे कोई कितना भी दूर करना को तुझसे, उतना ही करीब होता जाऊंगा तेरे।
ऐरा गैरा नत्थू खैरा समझना है जिसे जो समझे, हमने जाना है जो भी तेरी नजरों से।
मुश्किल है भुला पाना तुझको, सबक प्यार का जो भी पढ़ा है तुझसे।
दीवालीयेपन की कगार पे हूँ तो क्या, शुरूआत होती है सदा शून्य से।
घिनौने रहे होंगे मेरे कर्म, उसकी परवा न करते कर दिखाऊंगा कहा तेरा।
गवारा न है किसीको साथ हमारा, हंसते हंसाते सँवारूँगा तुझे प्यार से अपने।
दामन छुड़ाना चाहे आज हर कोई हमसे, होगा ऐसा भी तेरे दामन मैं ढूंढ़गे सब मुझे।
सलामत रहना तुम सदा, सलामत रहे प्यार तेरा, मिट मिटके गूलशन करुँगा तेरे जहां को।


- डॉ.संतोष सिंह