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Hymn No. 269 | Date: 10-Aug-1998
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मुझे हर पल नाम लेना है उसका, बिन चूके करते रहना है प्रणाम ।
मुझे हर पल नाम लेना है उसका, बिन चूके करते रहना है प्रणाम ।
मन के हर कोने में सदा वो रहे, बिन खोये खुद में, खोया रहूँ उसमें ।
भटकें मेरा तन कहीं भी कार्य करतें हुये, मेरा ध्यान सदा उसपे रहे ।
जो कुछ भी करूँ सौंप दूँ उसे सारी की सारी निर्भिक होके ।
हर पल तरसता रहूँ मैं उसके लिये जैसे जल बिन मछली ।
जुदा रहूँ मैं उससे तो क्याँ पर मेरे मन में वो इक् ही रहे ।
कृपा चाहिये मुझे तेरी इतनी, सदा रहे मेरे नैनों में छवि तेरी ।
दिल को मेरे रहे अहसास की तू है मेरे करीब ।
सताऊँगा मैं खुद को खुद से तेरे पास जाने के लिये ।
हर इक् सजा मुझे है कबूल तेरी, पर जुड़ा रहूँ मैं तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह