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Hymn No. 270 | Date: 11-Aug-1998
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बन जाने दे मोहे तेरा पागल प्रेमी, सुध में रहके क्या करना, जब अपने परायें का भेंद हो।
बन जाने दे मोहे तेरा पागल प्रेमी, सुध में रहके क्या करना, जब अपने परायें का भेंद हो।
हमें तो बस यें लगें हर पल तू हमारे संग है, पागल कोई कहे तो क्यों परवाह करूँ मैं ।
ना ही कीसी का ख्याल हो, हम तो मौज में गुजारेंगे हर पल तेरे ख्याल में ।
लोगों की नफरत – प्यारा जुड़ा है इस तन से, भूलके सब कुछ हमारा मन जुड़ा रहे तुझसे ।
कभी मंदिर – मस्जिद, भटका करेंगे गुरूद्वारें चर्च में, वहाँ रहते हो में जब तूम
कोताही ना की, तो क्यों पैदा हो हमारे दिलों में ।
गम और खुशी हर मन से निकल जाये पल – पल बस तेरा ख्याल हो।
रात बीते कीसी मयखानें में या शमशान में, दिल ही दिल में बातें होती रहे जगह हो कोई भी
गिर पडूँगा या भी जाऊँगा, कब-कहाँ जाऊँगा कीसी बात की क्यों चिंता करूँ बस डूबें रहे तुझमें।
महल में हूँ या गली, कुचे में, मान – अपमान किसका हो रहा है, जब वक्त आ गया सब घरा का धरा रह जायेगा खाली हाथ जान पड़ेगा ।
तन छूट गया तो क्या गम, पहले संग तू रहता था हमारे, अब हम रहेगे तेरे संग बदल के भी ना बदलेगा कुछ ।
न आनंद होगा, ना ही निरानंद, सब कुछ होके कूछ भी ना रहेगा, इक् तू है तू ही तू रहेगा।


- डॉ.संतोष सिंह