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Hymn No. 2731 | Date: 31-Oct-2003
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पूछा रे पूछा हवाओं से, जो आती है छूके तुझे।
पूछा रे पूछा हवाओं से, जो आती है छूके तुझे।
मेरा पूछा गवारा न लगे, पास से सरसराके गुजर जाता है मेरे ।
गया रे गया तेरी गलियों मैं, मिल जाये निशां कदमों के तेरे।
शरमाये न जाने क्यों मुझसे, तुझे छुपाये जेहन में हर पल मेरे।
ख्वाबों मैं तेरे अहसास को ढूँढूं, बिखर जाऊँ तेरी बगिया में ख्वाब बनके।
ताने मारे सारे फूल कांटे, न जाने कौन किस्मत को नजर लगाये।
सिसक उठता हूँ याद आते ही करनी अपनी, आंसू धुंधला जाये तस्वीर को तेरी।
सबब बनना चाहा प्यार का तेरे, उतनी ही मार खायी किस्मत की अपने।
पीछा छुड़ाये अब साया भी मुझसे, जो दिन रात पस्त होते देखा हालातों के आगे।
मजलूम अपनी बदकिस्मती पे भी मुस्कराये, तेरा नाम बन चुकी जो धड़कन मेरी।


- डॉ.संतोष सिंह