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Hymn No. 2732 | Date: 31-Oct-2003
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बानगी है ये तेरे प्यार की, जो खाकसार की किस्मत को रोशन कर जाये।
बानगी है ये तेरे प्यार की, जो खाकसार की किस्मत को रोशन कर जाये।
हम तो उन उल्लुओं मैं से एक हैं, जिनको देंख न जाने कितनी कहावतें जन्म लें।
गौर फरमाइये आज आप भी जानके अनजान न बनिये खुदा मेहरबाँ तो है गधा पहलवान।
इस जुमले को जिसने भी बनाया होगा, किसी जन्म मैं मुझे तबियत से देखा होगा।
कई बार दूसरों के मुर्खताओं को भांपा, भांपते भांपते खुद को मूर्खता के कंगूरे पर पाये।
हैरान हो गया हूँ आज ये जानके, दुनिया में जो हूँ अव्वल दर्जे का उल्लू।
चाहके भी दूर न कर पाऊँ, दुनिया मैं हर एक से जो बदतर गिना जाऊँ।
मार है ये कैसी, ये मार नहीं किसीकी, मारा हूँ हालातों और अपनी मुर्खताओं का।
चला था किसी का हम दम बनके, कसमें न जाने कितनी खायी निभायी न एक भी।
कब चाहा अपना कर पाऊंगा, गुजरते समय के रहते कब तेरे ख्वाबों मैं रंग भर पाऊंगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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