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Hymn No. 2733 | Date: 31-Oct-2003
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चैन कहां से लाऊँ, चैन कहां से लाऊँ, जो चैन छीना हमने तेरा।
चैन कहां से लाऊँ, चैन कहां से लाऊँ, जो चैन छीना हमने तेरा।
न जाने कितनी कसमें खायी, वख्त पड़ने पे फरियादों का रोना रोया।
बनने चले थे लंबरदार तेरे प्यार के, हद कर दी इम्तहां में।
कैसे गुजरेगा आने वाला पल, गुजर तो जायेगे हम ऐसी भी।
कैसे बताऊँ क्या होता है, दिन को सोके रातों को रोता हूँ।
बेबसी की जंजीर मैं जकड़ा हुआ, पल पल तुझसे फरियाद करता हूँ।
तेरे रहते जो न सुना तेरी बातों को, तो उसका अंजाम भुगतता हूँ।
दयालु तू तब भी था, और अब भी हैं, कहने से न जाने क्यों डरता हूँ।
बीत गया हूँ, बीत जाऊंगा, पर बीतते बीतते तेरे ख्वाबों का अमिट हिस्सा बन जाऊंगा।
- डॉ.संतोष सिंह
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बानगी है ये तेरे प्यार की, जो खाकसार की किस्मत को रोशन कर जाये।
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चाहत मेरी अब भी न मरी है, जेहन में रहके पल पल कौंधती है।
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