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Hymn No. 2735 | Date: 03-Nov-2003
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मत करो, मत करो, कुछ ऐसा, मेरे कर्मों के नाम पे जो गिर पडूँ दुनिया के चरणों मैं।
मत करो, मत करो, कुछ ऐसा, मेरे कर्मों के नाम पे जो गिर पडूँ दुनिया के चरणों मैं।
गिरने का न डर है मुझे, पर मेरे हाल को देखके दोष न दे दे कोई तुझे।
गुजरा है, आने वाला दिन गुजर जायेगा, बंदे को जो तूने न अपनाया वो बिखर जायेगा।
होने को तो होता है सब कुछ अच्छा, पर छटपटाता हूँ हर हाल पे अपने।
मेरी बदनसीबी का अंत कब होगा, कब बेफिक्री में होके जीना सीखूंगा।
मत टाल तू धुमा अब मुझे, कर दे कुछ ऐसा कर जाऊँ पुरा तेरे बताये कार्यों को।
स्वीकार ना होगी तुझे कोई बात मेरी, पर अस्वीकार न किया है कभी तूने मुझे।
मां तेरी विशाल दयालुता है, जो इस अधम को स्वीकार करे चरणों मैं अपने।
माँ अपने आँसू से आहत न करना चाहूँ, तेरी हंसी के वास्ते खुदको लौटाना चाहूँ।
चस्पायीँ हुई किस्मत के हालातों को न ढोना चाहूँ, तेरी बंदगी मैं जीवन गुजारना चाहूँ।


- डॉ.संतोष सिंह