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Hymn No. 2736 | Date: 03-Nov-2003
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वो हंसने वालों हँसो - हँसो, हँसो - हँसो, अधिकार है तुम्हें मुझपे पूरा हंसने का।
वो हंसने वालों हँसो - हँसो, हँसो - हँसो, अधिकार है तुम्हें मुझपे पूरा हंसने का।
जीवन के घनघोर हालातों के आगे, जो हमने घुटना टेका पूर्ण समर्थ के रहते।
चाहतों में न कभी रंग भरना चाहा, जिंदगी को मजाक बनाके जीना चाहा।
कैसे कहूं मैं अपनों से, जो उस सर्वोत्तम के सपनों को सच न कर पाया।
प्रयासों के आगे टूटा किस्मत का बांध, उन प्रयासों को साध्य बना न पाया।
हंसते हुये लोगों के बीच हंसी का पात्र बन गया, सार्थक से वास्ता रहा न कभी।
समय के रहते सही भावना न आयी, जिंदगी जो अपनी जगह ठहर गयी।
आग लगी जब सब कुछ बिखर गया, संवारने से पहले खुद को लुटा लिया।
चिल्लायाँ तेरे आगे प्रभु तब बहुत, पर दम निकल गया जमाने से पाला पड़ते।
जब तू रहा न प्रभु पास हमारे, तुझपे ही टिका है प्रभु सब कुछ हमारा।


- डॉ.संतोष सिंह