My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2744 | Date: 10-Dec-2003
Text Size
खामियाजा, खामियाजा और कितना, इस तन मन को है भुगतना।
खामियाजा, खामियाजा और कितना, इस तन मन को है भुगतना।
तेरा कहा न करके और कितना, इस दुनिया में हमको है भटकना।
तेरे पास रहके है तुझसे, और कब तक दोराहों पे है चलना।
विश्वास के नाम पे कब तक अविश्वासों से भरा जीवन है जीना।
आशा और निराशा के पाटों के बीच रहते कब तक है पिसना।
मंजिल के नाम पे बेमंजिल की मुसाफिरी कब तक है करना।
कर्मों की सूली पे खुदको ओर तुझको कब तक चढ़ाते है रहना।
न जाने कितने सवाल है मनमैं, उनके जवाबों से कब तक है दूर रहना।
लूट चुका हूँ हर तरह से, क्या इसी तरह जिंदगी को अब है गुजारना।
जीवन के अनचाहे इन दौर से, कब तक मजबूर होके है जीना।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
तुम कहते हो और हम न करते है,
Next
मैं कोई न शूरवीर हूँ, जो जी जान लगा दे तेरा कहा करने मैं।
*
*