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Hymn No. 2745 | Date: 10-Dec-2003
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मैं कोई न शूरवीर हूँ, जो जी जान लगा दे तेरा कहा करने मैं।
मैं कोई न शूरवीर हूँ, जो जी जान लगा दे तेरा कहा करने मैं।
मैं कोई न बुध्दिमान हूँ, जो रंग भर दे तेरी हर चाहतों मैं।
मैं कोई न अलबेला हूँ, जो ना रोऊँ तेरे आगे अपने दुःखों का रोना।
मैं कोई न हूँ ऐसे सांचे मैं ढला, जो हर दौर मैं माहिर हो जिंदगी के।


- डॉ.संतोष सिंह