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Hymn No. 2747 | Date: 13-Dec-2003
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जो है, सो है, उसके लिये क्या रोना।
जो है, सो है, उसके लिये क्या रोना।
जिंदगी बीत जायेगी, हम तो बस है खिलौना।
मजबूर है प्रारब्ध के आगे, जो तुझसे दूर रहके।
कर्मों से न कोई लेना देना, ज्यों का त्यों है गुजरना।
बहुत कुछ न था कभी, जो कुछ है वो एक तू है।
तेरे पास रहके दे न सके अंजाम जो जिंदगी को।
खोया हूँ बहुत कुछ, इस छोटी सी जिंदगी में।
जब जब पाने का किया प्रयास, तब तब पड़ा है रोना।
पल दर पल गुजरती जिंदगी कुछ न कुछ खिखाती जाये।
सीख से भी न कुछ सिखा, शिकंजों ने जो जकड़ा था हमको।
अंतर मैं करने का माद्दा क्यों न है, जो मिटाये मतभेदों को।
चला हूँ तेरे पास से, चाहे जो हो पहुँचके दम लूंगा तेरे पास मैं।
पाना चाहूँ मजिल को, उससे पहले खरा उतरना चाहूं हर कसौटी पे।
बहुत हो गया, बहुत हो गया, परे हो जाना चाहूँ जिंदगी के हर अंदाज से।


- डॉ.संतोष सिंह